द न्यूज डेस्क।जबलपुर। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पीएचई सिहोरा का कार्यालय इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बना हुआ है। सरकार का अभिन्न अंग कहा जाने वाला विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सहित अनेक कार्या के लिए जाना जाता है। परंतु ग्रामीण जनता की समस्याओं को सुलझाने वाले जिम्मेदार आला अधिकारी महीनों से दफ्तर से नदारद हैं। आलम यह है कि जिस विभाग पर पूरे क्षेत्र में पानी की व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी है, उसका दफ्तर अब दैनिक वेतनभोगी (दैनिक भोगी) कर्मचारियों और चपरासियों के भरोसे चल रहा है।
साहब नदारद, कुर्सी खाली
सिहोरा और आसपास के दर्जनों गांवों से अपनी शिकायतें लेकर आने वाले ग्रामीण रोजाना चक्कर काटने को मजबूर हैं। दफ्तर में अधिकारियों की कुर्सियां धूल फांक रही हैं। अनेक जन अपनी समस्याओं को लेकर तो आते है। और उनको केवल निराशा का सामना करना पड़ता है। क्योकि यहां के जिम्मेदार साहब को झांकने की तक फुर्सत नहीं है। दफ्तर में मौजूद चपरासी और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी केवल फरियादियों के आवेदन जमा कर लेते हैं, लेकिन साहब के न होने के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती।
और तो और यहां एक रटा रटाया जबाव तैयार रहता है, कि श्साहब दौरे पर हैं या बैठक में गए हैं। महीनों से यही बहाना सुनने को मिल रहा है।
कागजों में दौरा, हकीकत में दफ्तर से दूरी?
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि अधिकारी केवल सरकारी कागजों में दौरा और फील्ड विजिट दिखाकर अपनी हाजिरी बजा रहे हैं, जबकि धरातल पर विभाग का काम पूरी तरह ठप्प पड़ा है। वेतन पूरा उठाया जा रहा है, लेकिन जवाबदेही शून्य है। वहीं गुप्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार पीएचई विभाग के एसडीओ मनमर्जी के मालिक है। क्योकि साहब कार्यालय तो आते नहीं परंतु साहब की चाटुकारिता करने वाले कुछ कर्मचारियों को साहब ने खुली छूट दे रखी है। जो मर्जी के मालिक है। और कागजों में ही दौरा करके अपने कार्य को कर रहे है। वहीं नाम ना छपने की शर्त पर एक कर्मचाररी ने बताया कि कोई साहू साहब है। जो एसडीओ साहब को अपने जेब में रखने की बात खुलेआम हमेशा कहते नजर आते है। और अपने आप को साहब का खासम खास बताते है। और जबलपुर से सिहोरा कार्यालय पहंुचे या ना पहंुचे उनका कोई कुछ नहीं कर सकता क्योकि साहब की सेंटिंग उपर तक होने का दावा करते है। और वेतन काटने की तो कोई सोच भी नहीं सकता ।
अपर कलेक्टर पहुंचे सिहोरा तो चेहरा दिखाने पहुंचे थे विभाग के अधिकारी
वहीं गत दिवस सिहोरा में समस्त विभागों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई तो विभाग के आला अधिकारी ऐसे पेश हुए जैसे अपने कार्य को पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी से निभाते हो परंतु जमीनी हकीकत कुछ और बताती है। जिसकों को अपर कलेक्टर नीता राठौर से इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होने जल्द दिखवाकर कार्यवाही की बात कहीं थी ।
क्या जागेगा प्रशासन?
सरकारी खजाने से मोटा वेतन लेने वाले अधिकारियों की इस मनमानी से पूरे क्षेत्र में आक्रोश है। अब देखना यह होगा कि इस धमाकेदार खुलासे के बाद जिला प्रशासन और पीएचई के उच्च अधिकारी नींद से जागते हैं या सिहोरा का यह महत्वपूर्ण विभाग यूं ही कर्मचारियों के भरोसे चलता रहेगा।










