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प्रशासन की बड़ी लापरवाही से बेला सोसाइटी के उपार्जन केंद्र अन्नपूर्णा वेयर हाउस में अनेक किसानों की उपज पानी में डूबी

द न्यूज 9 डेस्क जबलपुर । गत दिवस अचानक हुई तेज बारिश से सिहोरा तहसील अंतर्गत बेला सोसाइटी के उपार्जन केंद्र अन्नपूर्णा वेयर हाउस में तौल के लिए रखी गेंहू की अनेक किसानों की उपज पानी में गई और ज्यादा लम्बे समय तक पानी में डूबे रहने से गेंहू की उपज खराब हो गई और अधिक सड़ाध मारने लगी। गत दिनों अचानक हुई तेज बारिश से खुले में रखा क्वींटलों गेहूं खराब हो रहा है । इस बार गेहूं की खरीदी के लिए गोदाम स्तरीय उपार्जन केंद्रों को प्राथमिकता दी गई थी जिससे जल्द से जल्द खरीद कर उपज गोदामों में रखा जा सके । परंतु खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था और बारदानों की कमी के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी और हजारों क्विंटल गेहूं खुले में पड़ा रहा और अचानक हुई तेज बारिश से खरीदी केन्द्रों में पड़ा गेंहू पानी में डूब कर खराब हो गया। किसानों के अनुसार गोदाम स्तरीय केद्रों की हालत तो और खराब है , जहां उपार्जित गेहूं गोदाम में रखा जाना है लेकिन उठाव नहीं होने के कारण वह खुले में ही रखा रहा । बारिश से यह न सिर्फ भीगा बल्कि लंबे समय तक पानी में रहने के कारण खराब भी हो रहा है । इससे किसानों को नुकसान और भुगतान होने पर भी खतरा मंडरा रहा है । और किसानों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है ।

चक्रवाती तूफान ताऊ ते बना आफत
अरब सागर का चक्रवाती तूफान ताऊ ते जिले के किसानों के लिए आफत साबित हुआ । अनेक खरीदी केंद्रों में बेमौसम बारिश से किसानों की रखी फसल भीग गई और ज्यादा समय तक पानी में रहने से उपज सड़ कर सड़ाध मारने लगी। आलम यह रहा कि खुले में रखे गेहूं की बोरियां भीग गईं और खरीदी केंद्र में तालाब जैसी स्थिती देखने मिली। और मौसम साफ होने के बाद खरदी केन्द्र मंे उपस्थित स्टाफ और किसानों ने भीगे और सूखे गेहूं को अलग करने का काम किया ।

प्रशासन की बड़ी लापरवाही, खेत में क्यों बना दिया गया खरीदी केंद्र –

बेला सोसाइटी का उपार्जन केंद्र अन्नपूर्णा वेयर हाउस में बनाया गया था । अव्यवस्थाओं के चलते समिति प्रबंधक द्वारा किसानों का गेहूं खेतों में रखा दिया गया । बारिश के दौरान खेतों में पानी भर जाने के साथ भरे पानी की निकासी ना होने के कारण खेतों में रखा गेंहू पानी में रहने के कारण अब बदबू मार रहा है । इसमें प्रशासनिक लापरवाही साफ झलक रही है जब खरीदी केन्द्र में किसानों की उपज के रख रखाव की पर्याप्त व्यवस्थाऐ और संसाधन उपलब्ध नही थे तो अन्नपूर्णा वेयर हाउस में खरदी केन्द्र क्यों बनाया गया।
केंद्र की खरीदी का लक्ष्य 1 लाख 33 हजार क्विंटल था , जिसमें से लगभग 1 लाख क्विंटल की खरीदी कर भंडारण किया जा चुका है ,परंतु बारदाने की कमी के कारण लगभग आठ से दस हजार क्विंटल गेहूं खेतों में रखा रहा । और बारिश से पानी मंे भीगकर खराब हो गया।


शिकायत पर अन्नपूर्णा वेयर हाउस पहुंचे अधिकारी ,
खरीदी केंद्र में पानी भरने की शिकायत पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने आनन फानन में मानक – अमानक को दरकिनार करते हुए भीगे एवं सड़े गेहूं की तौल प्रारंभ कराई । और किसानों को आश्वासन दिया की सभी का गेंहू तौल कराकर खरीद कर ली जावेगी। परंतु जिस किसान का गेंहू पानी में डूब कर सड़ गया और उठाया नही जा सका उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
इस अवसर पर तहसीलदार सिहोरा राकेश चैरसिया , खाद्य निरीक्षक मीनाक्षी दुबे , भारतीय किसान यूनियन जिला अध्यक्ष रमेश पटेल सहित अनेक किसान उपस्थित रहे।

किसानों का कहना है

खरदी केन्द्र में घुटना निवासी रमनदीप ने बताया कि 21 मई को एसएमएस प्राप्त होने पर वह 300 क्विंटल उपज लेकर अन्नपूर्णा वेयर हाउस पहुंचे थे परंतु बारदाने की कमी के चलते उसकी तौल नहीं हो सकी और बारिश में गेहूं पानी में डूब गया। लगभग 20 क्विंटल गेहूं मिट्टी में मिलकर खराब हो गया है । किसान वीरेंद्र सिंह ने कहा कि वह 170 क्विंटल गेहूं लेकर आए थे । पानी में भीग जाने के कारण ऊपर ऊपर की गेहूं की तौल लगभग 110 क्विंटल की हुई है । बाकि गेहूं खराब हो गया ।

किसानों ने उठाए अनेक सवाल
किसानों ने उठाए अनेक सवाल कि बेमौसम बरसात से केंद्र में तौल के लिए रखे गेंहू के खराब होने की जवाबदारी किसकी होगी । जबकि मौसम विभाग लगातार तेज बारिश की चेतावनी दे रहा था , फिर भी खेत में गेहूं क्यों रखाया कराया गया । और जब अन्नपूर्णा वेयर हाउस में पर्याप्त व्यवस्थाएँ और संसाधन नही थे तो खरीदी केन्द्र क्यों बनाया गया|

आश्वासन के बाद अगर नहीं हुई पानी में डूबी उपज की खरीदी तो किसान कर्जे के बोझ में लद जावेगा साथ ही उसी उपज की खरीदी में जो पैसा मिलता उससे किसान लिया हुआ कर्ज चुकता करता और शादी ब्याह आदि की तैयारी कर पाता, परंतु अगर उसकी उपज की खरीदी नही होती तो कर्ज में लदा किसान फिर कर्ज में लद जाएगा ओर उसके सभी अरमानों में पानी फिर जाएगा। ऐसा न हो कि अधिकारियों द्वारा दिया हुआ आश्वासन झूटा न साबित हो जाए। अगर आश्वासन ही झूठा साबित हुआ तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

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