द न्यूज 9 डेस्क। जबलपुर | सिहोरा में अनेक क्लीनिकों के अंदर कुछ फर्जी पैथालॉजियां संचालित होने की लगातार चर्चाओं से बाजार गर्म था। जब उक्त फर्जी पैथालॉजियों की जानकारियां जुटाई गई तो चौकाने वाले तथ्य निकल कर सामने आए।
पूरा मामला सिहोरा के मृगनयनीय मार्ग स्थित एक निजी क्लीनिक के अंदर फर्जी तरीके से पैथालॉजी संचालन करने का मामला प्रकाश में आया है। गुप्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त पैथालॉजी का संचालन लम्बे समय से गुपचुप तरीके से किया जा रहा था। जिसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को तक नहीं थी, और उक्त पैथालॉजी का ना किसी प्रकार का पंजीयन है। ना किसी प्रकार के दस्तावेज और कागजों के नाम पर केवल एक प्रायवेट कंपनी ईलाईट के नाम का रजिस्टेशन कराकर उक्त पैथालॉजी को धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा है। और सबसे चौकाने वाली बात यह है। कि किसी पैथॉलाजी को संचालित करने के लिए पैथालॉजिस्ट की निगरानी में जांचो की रिर्पोट तैयार की जानी चाहिए परंतु यहां बोर्ड पर लगे बड़े बड़े नामों वाले पैथालॉजिस्ट कभी देखे ही नहीं गए और तो और एक डॉक्टर जिनका नाम बड़े धडल्ले से उपयोग किया जा रहा है। उन डॉक्टर साहब को इसकी जानकारी तक नहीं है। की उनके नाम से पैथालॉजी का संचालन किया जा रहा हैं
वहीं दूसरा व्यक्ति जो खुद को पैथालॉजिस्ट और उक्त लैब का खुद को मालिक बताता है। वह बचैया के स्वास्थ्य केन्द्र में टेक्निशिन के रूप में कार्य करता है। और इन सब के नाम पर लैब में मौजूद किसी भी व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर करके रिर्पोट तैयार कर दे दी जाती है।
जब उक्त पैथालॉजी के संचालन के संबंध में स्वास्थ विभाग के अधिकारियों से जानकारी जुटाई गई तो पता चला की स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को ना तो ब्लॉक स्तर पर और ना ही तहसील स्तर पर इस पैथालॉजी संचालन के संबंध में कोई भी जानकारी नहीं हैं और विभाग को बिना सूचना के चोरी छिपे उक्त फर्जी पैथालॉजी का संचालन किया जा रहा है।
बड़ी कंपनी की आड में बिना दस्तावेजों की पैथालॉजी
वहीं शासकीय सिविल अस्पताल के सामने भी एक नामी कंपनी के नाम से पैथालॉजी लैब का संचालन किया जा रहा हैं और उक्त पैथालॉजी संचालक के पास भी ना दस्तावेजों का पता है। और ना गुतास्ता और ना ही कोई पैथालॉजिस्ट का पता है। केवल बड़ी कंपनी की आड़ में धड़ल्ले से पैथालॉजी संचालित की जा रही है। और तो और इन होनकार पैथालॉजी संचालकों द्वारा पैथालॉजी से निकले वाले मेडिकल के कचरे को खुले में छोड़ दिया जाता हैं या नगर पालिका की कचरा गाड़ी में डाल दिया जाता है।
इनका कहना है।
कुछ पैथालॉजियों की जानकारी प्राप्त हुई है। जो स्वास्थ विभाग की जानकारी में नहीं थी उक्त पैथालॉजियों के दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
डॉ अर्शिया खान, बीएमओ सिहोरा,











