द न्यूज 9 डेस्क।जबलपुर। मध्य प्रदेश शासन के म.प्र. उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 एवं नियम, 1997 (यथासंशोधित) 2021 के अंतर्गत निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों को पंजीयन 3 वर्ष की अवधि के लिए प्रदान किया जाता है। निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर संबंधित संस्थानों को पंजीयन नवीनीकरण हेतु आवेदन करना अनिवार्य होता है।
नवीनीकरण की प्रक्रिया एमपी ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से प्रतिवर्ष 1 जनवरी से 28 फरवरी तक संचालित की जाती है। इसके उपरांत मार्च माह में संबंधित अस्पतालों एवं क्लीनिकों का निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण में निर्धारित सभी मापदंडों को पूर्ण करने वाले एवं जिनके दस्तावेजों की हार्ड कॉपी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, जबलपुर में जमा होती है, उन्हीं संस्थानों का पंजीयन नवीनीकरण किया जाता है।
वर्ष 2025-26 में कुल 55 अस्पतालों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, जिसमें कुल 02 अस्पतालों द्वारा स्वयं अस्पताल बंद करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया। 01 अस्पताल द्वारा पंजीयन नवीनीकरण हेतु आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। 1 अस्पतालों के दस्तावेज नगर निगम एवं अन्य विभागों से सत्यापित नहीं पाए जाने के कारण उनका पंजीयन नवीनीकरण नहीं किया गया। 1 अस्पताल में निरीक्षण के दौरान उपयुक्त स्टाफ उपस्थित नहीं था।
इसी प्रकार, जबलपुर जिले में कुल 240 क्लीनिकों का पंजीयन नवीनीकरण प्रस्तावित था, जिनमें से 89 क्लीनिकों द्वारा नवीनीकरण हेतु आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया, एवं 32 क्लीनिक के द्वारा अनुपयुक्त एवं अपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किये गये जिसके फलस्वरूप उनका पंजीयन नवीनीकरण नहीं हो सका।
जिसके फलस्वरूप म.प्र. उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 एवं नियम, 1997 (यथासंशोधित) 2021 के प्रावधानों के अनुसार, जिन अस्पतालों एवं क्लीनिकों द्वारा पंजीयन नवीनीकरण नहीं कराया गया है अथवा जिनका पंजीयन निरस्त/अस्वीकृत हुआ है, उनकी संचालन अनुमति दिनांक 01 अप्रैल 2026 से समाप्त की जाती है।
जिसमें














संबंधित अस्पताल एवं क्लीनिक संचालकों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्देशित किया गया, तत्काल प्रभाव से किसी भी नए मरीज को भर्ती न करें। वर्तमान में भर्ती मरीजों का समुचित उपचार पूर्ण कर उन्हें डिस्चार्ज करें। क्लीनिक/अस्पताल का संचालन तत्काल बंद करें। साथ ही, जिन अस्पतालों एवं क्लीनिकों का पंजीयन निरस्त/अस्वीकृत हो गया है, उन्हें यह भी निर्देशित किया गया कि वे अपने अस्पताल / क्लीनिक भवन के बाहर लगे नाम-पट्ट (बोर्ड) को तत्काल प्रभाव से हटा दें। यदि किसी संस्थान द्वारा उक्त निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो उनके विरुद्ध मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के अंतर्गत विधिक कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी। साथ ही किसी क्लीनिक संचालक द्वारा पंजीयन हेतु आवेदन समय सीमा में करना शेष रह गया है, तो वे एमपी ऑनलाईन के माध्यम से पुनः नवीन आवेदन प्रस्तुत करें। निरीक्षण उपरांत सभी मापदंडों के अनुरूप पाए जाने पर ही पंजीयन प्रदान किया जाएगा, जिसके पश्चात् ही संचालन प्रारंभ किया जा सकेगा।
बिना वैद्य पंजीयन के अस्पताल अथवा क्लीनिक का संचालन किए जाने पर मध्य प्रदेश नर्सिंग होम एक्ट के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की जाएगी।










