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अन्नदाता के साथ कृषि उपज मंडी में आए दिन हो रही ठगी, चोरी, मुद्दत कटने जैसी घटनाएँ, अंकुश लगाने में नाकाम मंडी प्रशासन,

द न्यूज 9 डेस्क।जबलपुर। सिहोरा। जबलपुर जिला की सिहोरा तहसील अंतर्गत आने वाली कृषि उपज मंडी आए दिन किसी ना किसी कारण सुखिर्याे में रहती है यहां अन्नदाता की उपज की चोरी होना, अन्नदाता के साथ व्यापारियों द्वारा उपज में ठगी कर अधिक तौल करना और मुद्दत काटने सहित अनेक मामले आए दिन चर्चा में रहते है। परंतु कार्यवाहियों के नाम पर न्याय की मूर्ति बनी बैठी मंडी सचिव आज दिनांक तक किसी भी शिकायत पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर पाई और केवल खनापूर्ति तक ही कार्यवाहियों को सिमित कर दिया जाता है। और इन सब पर अंकुश आज तक नहीं लग पाया। और दिनों दिन ऐसी वारदातें बढ़ती ही जा रही है।
क्या है। मामला
ताजा मामला गत शुक्रवार का है जब सिंघाड़ा चोरी को लेकर बवाल मच गया ,किसानों की मानें तो मंडी सचिव सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी शाम 5 बजे मंडी से घर चले गए थे और बाद में जब किसानो ने जिला अधिकारियों को फोन लगाया तब कहीं जाकर मंडी सचिव सिहोरा कृषि उपज मंडी पहुँची और किसानों से बातचीत की तो वहीं किसानों ने आरोप लगाते हुए बताया कि कांटा तौल में रिमोट लगाकर राजेश जैन के काटे से 10किलो प्रति कट्टी की अधिक तौल की जा रही थी जिसे किसानों ने रंगे हाथ पकड़ा और ख़ेम कुमार पनिका के द्वारा जांच की गई जो कि सही पाई गई ओर पंचनामा भी बनाया गया और दस किसानों द्वारा शिकायत की गई इसी बीच रिमोट वाले काटे को मंडी से गोल कर दिया गया मंडी प्रशासन के पास भी एक कांटा है जो कि बिगड़ा हुआ बताकर रखा हुआ है ताकि इसी प्रकार की बारदातें होती रहे।

अव्यवस्था की भेट चढ़ रही हैं मध्यप्रदेश की मुख्य कृषि उपज मंडी

चोरी की वारदातों से लेकर अनेक अनियमितताओं के चलते व्यापारी और किसान दोनों परेशान हैं। स्थानीय कृषि उपज मंडी में किसानो की उपज चोरी जाने, तौल में गड़बड़ी, मुद्दत काटने जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसान सर्वाधिक उपज की चोरी से परेशान है। ए ग्रेड का दर्जा प्राप्त कृषि उपज मंडी में किसानों की उपज चोरी जाने के कारण किसान मंडी आने से कतराने लगे हैं।लेकिन मंडी सचिव कार्यवाहियों के नाम पर केवल खनापूर्ति करना जानती है।

आधा दर्जन किसानों के सिंघाड़ा में अधिक तौल

सिहोरा कृषि उपज मंडी एशिया की सबसे बड़ी सिंघाड़ा की मंडी है जिसमें न केवल सिहोरा तहसील बल्कि आसपास के जिलों से सिंघाड़ा किसान अपनी उपज लेकर उचित मूल्य प्राप्त करने सिहोरा आते हैं लेकिन शोषण के शिकार किसानों को यहां भी उपज की तौल में झोल कर चपत लगाई जा रही है। गत शुक्रवार को सिहोरा मण्डी में सिंघाड़ा गोटी का विक्रय करने आये किसानों ने जब अपने माल की तोल कम पाई तो उन्होंने इसकी शिकायत करने की कोशिश की लेकिन देखते ही देखते सारे आला अधिकारी मोके से नदारत हो गये किसानों ने इसकी शिकायत जब जिले के अधिकारीयो से की तब पुनः मण्डी सचिव ने कार्यालय पहुंचकर किसानों की शिकायत ली।
सिंघाड़ा किसान रामबरन बर्मन ने बताया कि वह अपने ग्राम सुपेली से 90 किलो सिंघाड़ा गोटी लेकर आया था जिसका विक्रयअनुबंध व्यापारी राजेश जैन के साथ हुआ था जब सिंघाड़े की तोल की गई तो उसका सिंघाड़ा 75 किलो निकला। झुमरू बर्मन ग्राम सुपेली ने बताया कि वह 65 किलो गोटी लेकर आया था लेकिन व्यापारी के तोल कांटे में उसका बजन मात्र 55 किलो निकला इसी प्रकार राम विशाल बर्मन 200 किलो सिंघाड़ा लेकर आए थे लेकिन उनके सिंघाड़े की 178 किलो की टोल की गई सुनील बर्मन 180 किलो सिंघाड़ा लेकर आए थे लेकिन टोल के उपरांत 168 किलो की पर्ची प्रदान की गई किसानों ने आरोप लगाते हुए है व्यापारी के इलेक्ट्रॉनिक कांटे में गड़बड़ी कर किसानों को ठगने की आशंका जताई है।
आजतक एक भी बड़ी कार्यवाही क्यों नहीं
बात की जाए कार्यवाहियों की तो सिहोरा की चर्चित कृषि उपज मंडी में किसानों द्वारा अनेकों बार उपज की चोरी, अधिक तौल, किसानों की मुद्द कांटने जैसी अनेकों शिकायते होती है। और उन शिकायतों पर कार्यवाही के नाम पर मंडी सचिव आज तक कोई भी बड़ी कार्यवाही कर पाने में नाकाम रही है। और ना ही आज तक किसी भी मामले में किसानों के हित में कोई बड़ी कार्यवाही करते हुए एफआईआर तक दर्ज नहीं करा पाई और केवल खानापूर्ति का पर्याय बनकर बैठी है। और बेचारा अन्नदाता उम्मीद करता है। कि इस बार शायद उसे न्याय मिलेगा और ठोस कार्यवाही होगी। परंतु वहीं कागजों में कार्यवाही सिमट कर रह जाती है। और अन्नदाता परेशान होता रहा है। और यह सब किसकी मिलीभगत से चल रहा हैं और चल रहा रहा है। तो एफआईआर जैसी कार्यवाही और कठोर कार्यवाही क्यों नहीं हो पा रही है।और कुछ जयचंदों को गोद लेकर केवल खानापूर्ति कर दिखावा कर दिया जा रहा है।
इनका कहना है।
इस संबंध में जानकारी प्राप्त हुई थी तत्काल मंडी सचिव को भेजा गया था। और प्रतिवेदन मंगवााकर कठोर कार्यवाही की जाएगी।
हरि राम लारिया, डिप्टी डायेक्टर, कृषि उपज मंडी, जबलपुर

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