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डिजिटल इंडिया के दौर में आदिम आंगनवाड़ी – टूटे फर्श पर पलट रहा मासूमों का निवाला, बदबू के बीच गढ़ रहे भविष्य

डिजिटल इंडिया के दौर में आदिम आंगनवाड़ी - टूटे फर्श पर पलट रहा मासूमों का निवाला, बदबू के बीच गढ़ रहे भविष्य

​द न्यूज 9 डेस्क।जबलपुर।सरकार एक तरफ नौनिहालों को सुपर फूड और श्स्मार्ट एजुकेशन देने के दावे कर रही है, वहीं गांधीग्राम के वार्ड नंबर 1 की आंगनवाड़ी केंद्र इन दावों की कड़वी हकीकत बयां कर रही है। यहाँ का आंगनवाड़ी केंद्र विभाग और पंचायत के बीच चल रही नूरा कुश्ती का अखाड़ा बन गया है। फर्श पर पड़े गड्ढे और चारों ओर फैली गंदगी के बीच बच्चे अपना भविष्य तलाशने को मजबूर हैं।
​1. फर्श नहीं खतरों की जमीन – खेलकूद तो दूर, बैठने में भी डर…
​आंगनवाड़ी के भीतर कदम रखते ही विकास के दावों की कलई खुल जाती है। फर्श पूरी तरह उखड़ चुका है, जहाँ गहरे गड्ढे बच्चों के लिए श्डेथ ट्रैपश् साबित हो रहे हैं। छोटे बच्चे चलते समय अक्सर इन गड्ढों में फंसकर चोटिल हो जाते हैं। विडंबना देखिए कि फर्श समतल न होने के कारण बच्चों की भोजन की थालियां तक पलट जाती हैं। मासूमों के हिस्से का पोषण इन गड्ढों की भेंट चढ़ रहा है।
2. प्यास बुझाने की जद्दोजहद- केंद्र के भीतर सूखा, बाहर से ढो रहे पानी….
​स्वच्छ भारत अभियान का नारा देने वाले प्रशासन ने इस केंद्र को पानी की एक-एक बूंद के लिए मोहताज कर दिया है। सप्लाई ठप होने के कारण आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रीति चौरसिया और सहायिका को दूर से पानी भरकर लाना पड़ता है। शौचालय की स्थिति इतनी खराब है कि वह उपयोग के लायक ही नहीं बचा। बिना पानी और शौचालय के यह केंद्र किसी सजा-घर से कम नजर नहीं आता।
3. पुलिया टूटी, गंदगी का अंबार- महामारी के मुहाने पर नौनिहाल…..
​केंद्र के ठीक सामने की तस्वीर और भी भयावह है। निकासी वाली पुलिया महीनों से टूटी पड़ी है, जिससे वार्ड का सारा कचरा और गंदा पानी वहीं जमा हो रहा है। सड़ांध मारती गंदगी और मच्छरों के प्रकोप के बीच बच्चे दिनभर बैठने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़ी महामारी या हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी यहाँ की सुध ली जाएगी।
​4. फाइलें दौड़ रहीं, समाधान थमा जिम्मेदारी के फुटबॉल बने मासूम…..
​इस बदहाली का सबसे दुखद पहलू प्रशासनिक रस्साकशी है। कार्यकर्ता प्रीति चौरसिया ने कई बार लिखित शिकायतें कीं, लेकिन विभाग इसे पंचायत का काम बताकर पल्ला झाड़ लेता है और पंचायत इसे महिला बाल विकास विभाग का मामला कह देती है। दो विभागों की इस खींचतान में वार्ड नंबर 1 के बच्चों का बचपन और स्वास्थ्य दोनों दांव पर लगे हैं।
​5. आक्रोशित ग्रामीण  सुधार  नहीं तो आंदोलन की चेतावनी….
​गांधीग्राम के निवासियों में इस उपेक्षा को लेकर भारी उबाल है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही फर्श की मरम्मत, पानी की बहाली और पुलिया की सफाई नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगे। जनता अब खोखले आश्वासनों के बजाय धरातल पर बदलाव चाहती है ताकि उनके बच्चों को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके।

खतरे में बचपन, जिम्मेदार कौन, आगनबाड़ियाँ है या बच्चों के जीवन से खिलवाड, बच्चों के हकों पर किसका डांका, जिम्मेदार कौन – सरकार, विभाग, जिम्मेदार अधिकारी या सरकारी ठेकेदार

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