द न्यूज 9 डेस्क।जबलपुर। श्रीमति सुनीता बाई कोल पति गोलू कोल वार्ड न 09 ईमलहापुरा सिहोरा के निवासी हैं। विगत दिनों सुनीता के पति का एक्सीडेंट हो जाने के कारण उनका पैर कट गया और वह विकलांग हो गया। सुनीता की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है।चूंकि बच्ची छोटी होने के कारण वह मजदूरी भी नहीं कर पाती हैं। सुनीता की सास श्रीमति द्रोपदीबाई बकरी चराकर अपना और परिवार का गुजारा करती है। सुनीताकोल ने दिनंाक 23.09.2024 को सिहोरा अस्पताल में एक बेटी को जन्म दिया था, वह सुनीता की प्रथम संतान थी जिसका वजन 2.800 किलोग्राम था जन्म के समय मॉ एवं बच्ची दोनों स्वस्थ्य थे। सुनीता ने अपनी बच्ची का नाम कशिस रखा। जन्म के पश्चात आशा कार्यकर्ता श्रीमति लक्ष्मी कोल द्वारा आशा सुपरवाईजर श्रीमति संगीता पटेल के मार्गदर्शन में निर्धारित एचबीपीएनसी की विजिट की गई तत्पश्चात आशा कार्यकर्ता द्वारा एच0बी0वाई0सी0 की 9 माह की विजिट माह जून 2025 में की गई। भ्रमण के समय तक मॉ और बच्ची दोनों स्वस्थ्य थे। दिनांक 16.07.2025 को जब आशा कार्यकर्ता भ्रमण के लिये सुनीता के घर गई तो ज्ञात हुआ कि बच्ची कशिस बहुत कमजोर है, जब आशाकार्यकर्ता द्वारा खानपान के बारे में पूछा गया कि तब सुनीता ने बताया कि बच्ची कशिस ठीक ढंग से खाना नहीं खा रही है। आशा द्वारा तत्काल उसे एन0आर0सी में भर्ती करने हेतु प्रेरित किया गया, जिस पर सुनीता दिनांक 17.07.2025 को कशिस को लेकर सिहोरा अस्पताल में उपस्थित हुई और अस्पताल में उस की सभी आवश्यक जॉचे हुई जॉच करने पर कशिस का हीमोग्लोबिन 2.2 आया जोकि गम्भीर एनीमिया का परिचायक है। उसे तत्काल मेडीकल रिफर किया गया किन्तु वह जाने के लिये तैयार नहीं हुई और घर भाग गई। दिनांक 19.07.2025 को आशा, आशा सुपरवाईजर, ए.एन.एम. एवं आर0बी0एस0 के0 की टीम को उसके घर भेजा गया और लगातार समझाया गया जिस पर सुनीता द्वारा जिला चिकित्सालय जाने की सहमति दी गई और मेडीकल अस्पताल जबलपुर जाने से स्पष्ट मना कर दिया गया।तत्पश्चात उसे जिला चिकित्सालय भेजा गया। जिलाचिकित्सालय में गम्भीर स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए रक्ताधान के पूर्व कन्सेंटफार्म पर सुनीता के हस्ताक्षर कराने हेतु बोला गया और बताया गया कि बच्ची की स्थिति गंभीर है तो सुनीता एवं गोलू कोल वहॉ से भाग आये और फोन बंद कर दिया और रिश्तेदारी में चले गये।आशा एवं टीम द्वारा उसके घर का बार-बार भ्रमण करने पर परिजन घर पर नहीं मिले और दिनंाक 28.07.2025 को ज्ञात हुआ कि सुनीता घर पर आ गई तब सूचना प्राप्त होते ही आशाकार्यकर्ता उसके घर पहुॅची और उसकी बात मुख्य खण्ड चिकित्साअधिकारी डॉ0 अर्शिया खान एवं बी0सी0एम0 वीरेन्द्र मेहरा से कराई, तब महिला अस्पताल जाने हेतु तैयार हुई।दिनंाक 29.07.2025 को आशाकार्यकर्ता जब उसके घर गये तब सुनीता बोली की आप चलो हम आ रहे हैं।आशा कार्यकर्ता करीब दोपहर 02.00 बजे तक अस्पताल में इन्तजार करती रही और जब उससे फोन पर बात किया तो सुनीता ने अस्पताल आने से मना कर दिया। आशा कार्यकर्ता द्वारा इसकी जानकारी सी0बी0एम0ओ0 एवं बी0सी0एम0 को दी गई, जिस पर बी0सी0एम0 वीरेन्द्रमेहरा द्वारा ए0एन0एम0 एवं आशासुपरवाईजर के साथ महिला के घर जाकर उसको समझाकर अपने साथ अस्पताल लेकर आये। अस्पताल में उसे पी0आई0सी0यू0 वार्ड में भर्ती कराया गया। उस समय उस बच्ची का ऑक्सीजन स्तर 53, हीमोग्लोबिन 2 ग्राम था।बच्ची की स्थिति बहुत ही गम्भीर होने के कारण उसे मेडीकल कालेज रेफर किया गया, किन्तु सुनीता की सास मेडीकल जाने से मना कर दी और पडोसियों को लाकर गाली-गलौंच एवं हंगामा करने लगी, जिस पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं ड्यूटीरत स्टाफ द्वारा समझाइश दी गई किन्तु महिला की सास नहीं मानी और आशा कार्यकर्ताकांे धमकी दी। तत्पश्चात मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी द्वारा उपसंचालक डॉ0 सोनाली ठाकरे से सुनीता, उसके पति एवं आशाकार्यकर्ता से बात कराई गई जिस पर सुनीता मेडीकल अस्पताल जबलपुर जाने के लिये तैयार हो गई और उसे 108 द्वारा मेडीकल जबलपुर में रात्रि 11.30 बजे आई0सी0यू0 वार्ड में भर्ती कराया गया जहॉ उसे तत्काल ब्लडट्रॉसफ्यूजन हुआ और बच्ची दिनंाक 03.08.2025 तक मेडीकल अस्पताल में भर्ती रही। स्थिति सामान्य होने पर उसे मेडीकल कालेज से डिस्चार्ज कर दिया गया और एन0आर0सी0 में भर्ती करने की सलाह दी गई, जिसके परिपालन में दिनंाक 04.08.2025 को सिविलअस्पताल सिहोरा में संचालित एन0आर0सी0 में भर्ती की गई, जिसका समुचित उपचार लगातार जारी है। और पहले की तुलना मंे बच्ची अब स्वस्थ है। जिसपर दस्तक अभियान ने बच्ची को जीवनदान दिया ।


















































































