मध्यप्रदेश की सर्वश्रेष्ठ पीएचसी का मिल चुका है। अवार्ड परंतु एएनएम और स्टाफ नर्स के भरोसे अस्पताल
द न्यूज 9 डेस्क। जबलपुर। सिहोरा। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ढ़िढोरा पीटने वाली सरकार के अनेक स्वास्थ्य केन्द्रों को खुद स्टाफ की कमी और बुनियादी सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। जिससे आयदिन लगातार मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और आखिरकार भटकने के बाद मरीज हारकर या झोलाछाप डॉक्टरों का शिकार बन जाता है। या तो जबलपुर जाता है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार मझगवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की इमारत तो खड़ी कर दी गई और उसे मध्यप्रदेश की सर्वश्रेष्ठ पीएचसी का आवार्ड भी दे दिया गया परंतु यहां एक एएनएम और एक स्टाफ नर्स के भरोसे पूरा अस्पताल कैसे चल रहा है यह तो भगवान जाने, भटकते मरीजों की पीड़ा देखने सुनने वाला कोई धनीधोरी नजर नहीं आता या विभाग के जिम्मेदारों ने मझगवां के भी स्वास्थ्य केन्द्र को लावारिस छोड़ दिया है।
आदेश के उड़ गई धज्जियां
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) जबलपुर द्वारा 27 मई 2026 को आदेश जारी कर स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की अटैचमेंट (संलग्नीकरण) तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उन्हें उनकी मूल पदस्थापना पर कार्य करने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि सभी कर्मचारी तत्काल अपने मूल पदस्थापना स्थल पर उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करें। इसी आदेश के पालन में मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी, सिहोरा ने 21 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर सिविल अस्पताल सिहोरा में कार्यरत एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां में मूल पदस्थ वार्ड बॉय मुकेश रजक को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करते हुए मझगवां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए। साथ ही आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि आगामी माह का वेतन केवल सार्थक पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर ही देय होगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आदेश जारी होने के बाद भी वार्ड बॉय मुकेश रजक द्वारा अब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। यदि यह जानकारी सही है तो यह वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की अवहेलना का मामला माना जा सकता है। वहीं दूसरी ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में आवश्यक कर्मचारियों की कमी के कारण मरीजों को समय पर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और अस्पताल में कार्यरत अन्य कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं होने से आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब सीएमएचओ और बीएमओ दोनों स्तर से स्पष्ट आदेश जारी हो चुके हैं, तो संबंधित कर्मचारी ने अब तक मूल पदस्थापना पर कार्यभार क्यों नहीं संभाला? ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से आदेश का कड़ाई से पालन कराते हुए आवश्यक कार्रवाई करने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने की मांग की है।
इनका कहना है।
उच्च अधिकारियों को कार्यवाही के लिए इस संबंध में अवगत कराया गया, जल्द ही कार्यवाही की जाएगी आदेश का पालन कराया जावेगा। और स्टाफ के लिए प्रयास जारी है।
डॉक्टर अर्शिया खान, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी, सिहोरा










