द न्यूज़ 9 डेस्क।जबलपुर।सिहोरा।सरस्वती शिशु मंदिर मार्ग वार्ड नम्बर 2 में चल रही सप्तदिवसीय भागवत कथा में महारास लीला,रुकमणी विवाह की मीमांसा करते हुए श्री नृसिंह पीठाधीश्वर डाँ स्वामी नरसिंह दास जी महाराज से व्यासपीठ से कहा की जीवन से भक्ति लग जाये तो उसी के सूत्र से भगवान प्रगट हो जाते है।गोपियों ने कन्हैया से कहा तू मेरा बस नही सारे जग का है एवं। विश्व की आत्मा है।एक बार भगवान प्रेमभरी चितवन से जिसकी ओर देख लेते है वो उसी के हो जाते है। परमात्मा ने जगत में अपने भक्तों को सुख आनंद प्रदान करने रास किया। ब्रज की रज रज में भगवान विराजमान है जिस तरह कृष्ण को कंश के धनुष यज्ञ में जाने यशोदा मना करती है क्योंकि उन्हें आभाष हो जाता है कन्हैया अब नही आयेगा उसी तरह जो भगवान के भक्त होते है उनके जीवन में घटने वाली घटनाएं प्रकाशित होने लगती है यही साधना की शिद्वी है।हर भक्त भगवान से यही वरदान चाहता है की वह कहीं भी रहे पर उसका मन भगवान की भक्ति में लगा रहे।कथा के पूर्व श्रीमती चन्द्र कला पांडे,पुष्पांजली हरिओम द्विवेदी, प्रीति दिलीप द्विवेदी,पूणिर्मा विवेक चतुर्वेदी, दिव्या रुपनारायण पांडे,शुभा मयंक चौबे,अंजनी गौतम,विष्णु गौतम आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया।


































































































































































