द न्यूज 9 डेस्क।जबलपुर। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आम जनता का एक मात्र सहारा सिहोरा का शासकीस सिविल अस्पताल स्वंय वेंटीलेटर पर सांसे गिन रहा है। और बड़े बड़े चुनावी वादों का ढिंढोरा पीटने वाल, कर्मठ, जुझारू, लगनशील और जनता के सच्चे सेवक बनने को ढोंग करने वाले नेता और जनप्रतिनिधी कुर्ता चमकाने और कार्यक्रमों में शामिल होकर माला पहनर फोटो खिचवाने में व्यस्त है।
मामला शासकीय सिविल अस्पताल सिहोेरा का है। जहां मरीजों को मिलने वाली बुनयादी सुविधाओं के नाम पर दर दर भटकने के साथ साथ पीने के पानी, डॉक्टर, साफ सफाई और आपातकालीन सेवाओे के नाम पर मजबूरन प्रायवेट और झोलाछाप डाक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।

सिहोरा की जनता से चुनाव के दौरान अनेक नेताओं ने बड़े बड़े वादे और कार्ययोजना बनाकर व्यवस्थाओं में सुधार के नाम ढ़िढोरा पीटकर जुमलेवाजी करने वाले नेता चुनाव जीतने के वाद सिहोरा की आम जनता को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे है। इन नेताओं को एक दिन की फुर्सत नहीं मिल पा रही की सिहोरा के शासकीय सिविल अस्पताल के भी दर्शन लाभ लेकर वहां भी अपना कुर्ता चमकाकर फोटो खिचवा ले और अपनी जुझारू, लगनशीलता और कर्मठत नेता वाली छवि सिहोरा के हित में आम जनता के लिए बता सकें और कार्य ना हो सके तो कम से कम सिहोरा की जनता को दिलासा ही मिल जाए। क्योंकि सिहोरा की जनता केवल आश्वासनों पर ही निर्भर बनकर रह गई है।

गंदगी का अंबार शोभा की सुपारी बना सुलभ कॉम्पलेक्स, पीने के पानी को तरसते मरीज, फटे गद्दे, गंदी चादर, और गर्मागर्म हवा फेकते पंखे,
सिहोरा के सिविल अस्पताल प्रांगण के अंदर लगा गंदगी का ढेर मरीजों को इतना स्वस्थ कर दे रहा है। कि मरीजों का इलाज तो दूर मरीज स्वंय अस्पताल आने से बचने लगे है। और सिहोरा के झोलाछाप डाक्टरों के चक्कर में फंसकर जबलपुर भागते है। और पीने के पानी के नाम पर खाली पड़े मटके और वॉटर कूलर से निकलने वाला गर्मा गर्म उबलता पानी मरीजों को पानी की तलाश में भटका रहा है। और विस्तर के नाम पर फटे गद्दे और गंदी चादरे और गर्मागर्म हवादर फंखे मरीजों को साक्षात प्रभु दर्शन करा रहे है। जिसके चलते या तो मरीज भाग खड़ा होता है। या निजी क्लीनिकों का सहारा ले रहा है।

जनरेटर की थी मांग विभाग ने थमा दिया हाथी
बिजली गोल होने की समस्या से जूझते अस्पताल को राहत के लिए विभाग से जनरेटर की मांग की जा रही थी परंतु विभाग की मेहरबानी ऐसी हुई की विभाग ने जनरेटर के नाम पर सिहोरा अस्पताल में हाथी थोप दिया जिसकी खुराक को पूरा कर पाने में अस्पताल प्रबंधन के भी हाथ पैर फूल जाते है। क्योकि अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 घंटे में लगभग 25 लीटर डीजल की खपत उस विभाग के थमाए जनरेंटर में आ रही है। जिसकी पूर्ति कर पाना सिहोरा अस्पताल प्रबंधन के हाथ में नहीं हो पा रही है।

अवैध पार्किग का अड्डा
सिहोरा के शासकीय सिविल अस्पताल परिसर में आसपास के निजी वाहन मालिकों ने अवैध पार्किग के लिए अस्पताल परिसर को ही अपना ठिकाना बना लिया है। और अपने निजी वाहनों को महिनों तक यहां पार्किग करके खड़ा कर दिया जा रहा है। जिसकों देखने सुनने वाला कोई धनीधोरी नहीं है।
डॉक्टर और स्टाफ की कमी से जूझ रहा अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग को लगातार जानकारी और खबरों के बाद भी ना तो विभाग को सिहोरा की स्वास्थ्य विभाग की समस्याएँ नजर आ रही है। और ना लगनशील नेताओं को देखने सुनने की फुर्सत है। लगातार डॉक्टरों और स्टाफ की कमी से जूझते अस्पताल पर ध्यान देने वाले जनता के सेवक भी अपनी फोटो सभाओं में व्यस्थ है। और आम जनता दर दर भटकने मजबूर है।
इनका कहना है।
जल्द से जल्द सिहोरा शासकीय सिविल अस्पताल की समस्याओं पर ध्यान देकर औचक नीरीक्षण कर निराकरण कराया जाएगा।
संतोष बरकड़े, विधायक, सिहोरा










